भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी

प्रेस विज्ञप्ति

20 अगस्त 2011

 

फासीवादी रमन सरकार द्वारा जारी फर्जी मुठभेड़ों की निंदा करो!

जनता पर जारी युद्ध - आपरेशन ग्रीन हंट को बंद करो!!

 

आदिवासी बच्ची मीना खलखो की फर्जी मुठभेड़ की खबर जनता के जेहन में पुरानी पड़ी ही नहीं, छत्तीसगढ़ की फासीवादी रमन सरकार ने एक और फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देकर अपने आदिवासी-विरोधी खूंखार चेहरे को फिर एक बार जाहिर किया हैं। दक्षिण बस्तर के केरलापाल क्षेत्र के चिकपाल गांव के पटेल मड़कामी मासा को पुलिस ने उसके घर से उठा ले जाकर 6 अगस्त 2011 को गोली मार दी और मुठभेड़ में एक अज्ञात नक्सलवादी के मारे जाने की घोषणा कर शव को दफना दिया। उसके पहले, पिछले माह सरगुजा जिले में मीना खलखो नामक 16 साल की किशोरी को पुलिसिया दरिंदों ने सामूहिक बलात्कार के बाद गोली मार दी और हमेशा की तरह मुठभेड़ में एक महिला नक्सलवादी के मारे जाने की घोषणा की थी। इसके पहले मार्च महीने में चिंतलनार इलाके में सरकारी सशस्त्र बलों द्वारा मचाया गया हत्या, लूट, गांव-दहन और बलात्कार का आतंकी अभियान सभी के दिमाग में ताजा ही है। इन घटनाओं पर छत्तीसगढ़ के अलावा देश भर में विभिन्न तबकों की जनता ने विरोध जताया और चिंतलनार की घटना पर तो सर्वोच्च अदालत तक ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। इसके बावजूद भी छत्तीसगढ़ सरकार ने फर्जी मुठभेड़ों में आदिवासियों की हत्या का सिलसिला बेरोकटोक जारी रखा हुआ है जैसे उसे इन सबकी कोई परवाह नहीं।

दरअसल, पहले सलवा जुडूम और अब आपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर जारी फासीवादी दमन अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के खासकर बस्तर व सरगुजा क्षेत्रों में सरकारी सशस्त्र बलों ने अब तक सैकड़ों आदिवासियों की हत्या कर दी। खासकर पिछले छह सालों के दौरान जितनी भी मुठभेड़ें हुई, जिनमें नक्सलवादियों के मारे जाने की घोषणा की गई, उनमें 99 प्रतिशत फर्जी थीं। गांवों पर हमलों के दौरान या तो लोगों को पकड़कर गोली मार दी जाती है या फिर देखते ही निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाई जाती हैं। लेकिन बहुत कम मौकों पर ही असलियत बाहर आ जाती है क्योंकि यह इलाका ऐसे युद्ध क्षेत्र में तब्दील हुआ है जहां से सच्चाइयों का बाहर आना बेहद मुश्किल है। सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करने वाले जनवादियों, पत्रकारों व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले किए जाते हैं और उन्हें यहां से भगा दिया जाता है।

भाकपा (माओवादी) की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मीना खलखो और मड़कामी मासा की निर्मम हत्याओं की कड़ी निंदा करती है। मड़कामी मासा की हत्या के खिलाफ उनके परिजनों और गांव के लोगों के अलावा विभिन्न आदिवासी नेताओं ने लामबंद होकर विरोध संघर्ष शुरू किया। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग से जनता चक्काजाम कर रही है और धरना दे रही है। लेकिन सरकार अभी भी दोषियों को बचाने पर ही तुली हुई है। दरअसल यह मानना गलत होगा कि पुलिस या अर्धसैनिक बलों द्वारा की जा रही फर्जी मुठभेड़ें सरकार के आदेश के बिना हो रही हैं। फर्जी मुठभेड़ों में आदिवासियों की हत्याओं का यह अभियान केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा समन्वय के साथ चलाए जा रहे आपरेशन ग्रीन हंट - जनता पर युद्ध - का ही हिस्सा है। सोनिया-मनमोहन-चिदम्बरम-प्रणब मुखर्जी-रमन सिंह शासक गिरोह की अगुवाई में माओवादी आंदोलन का जड़ से उन्मूलन करने की नाम से जारी इस अन्यायपूर्ण युद्ध का मकसद है देश की बहुमूल्य खनिज सम्पदा को विदेशी व बड़े पूंजीपतियों के हवाले करना। ऐसी हत्याओं से लोगों में दहशत फैलाकर उन्हें क्रांतिकारी आंदोलन के रास्ते से अलग करने की साजिश का हिस्सा है यह।

भाकपा (माओवादी) की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी छत्तीसगढ़ समेत देश की तमाम जनता व जनवादियों, मजदूर-किसानों, छात्र-बुद्धिजीवियों और लेखक-कलाकरों व पत्रकारों से अपील करती है कि वे मीना खलखो और मड़कामी मासा की हत्याओं के लिए जिम्मेदार पुलिस व अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों, उन्हें ऐसी करतूतों के लिए उकसाने वाले चिदम्बरम, रमनसिंह, शेखर दत्त, ननकीराम जैसे नेताओं को फौरन गिरफ्तार कर कड़ी सजा देने की मांग से आंदोलन छेड़ दें। मड़कामी मासा की हत्या के विरोध में बस्तर क्षेत्र में चल रहे जन संघर्ष को सहयोग दें और उसके तहेदिल से समर्थन करें। हम केन्द्र व राज्य सरकारों को चेतावनी देते हैं कि दमनकारी नीतियों का जवाब जन-प्रतिरोध को तेज करके ही दिया जाएगा और आदिवासियों की निर्मम हत्याएं कर उनके जल-जंगल-जमीन को हड़पने की साजिशों को नाकाम किया जाएगा। हम दण्डकारण्य की संघर्षशील जनता का आह्वान करते हैं कि वह सरकारी सशस्त्र बलों द्वारा की जा रही फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ संगठित, व्यापक व जुझारू संघर्ष करे और शोषक-लुटेरों के द्वारा चलाए जा रहे आपरेशन ग्रीन हंट को हरा दे।

 

(गुड्सा उसेण्डी)

प्रवक्ता,

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