भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

केन्द्रीय कमेटी

प्रेस विज्ञप्ति

17 जुलाई 2011

मुम्बई में हुए बीभत्सपूर्ण बम हमलों की भर्त्सना करो!

मक्का मस्जिद, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस समेत बम विस्फोट की सभी घटनाओं की

निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करवाकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग करो!!

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) मुम्बई में 13 जुलाई 2011 को हुए बम हमलों की तीव्र निंदा करती है। इन सिलसिलेवार विस्फोटों को, जिसमें लगभग 20 आम लोगों की मौत हुई और 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए, हमारी पार्टी अमानवीय मानती है। किन लोगों ने इन बम विस्फोटों को अंजाम दिया होगा यह स्पष्ट होने से पहले ही और जांच की प्रक्रिया तक शुरू होने से पहले ही लुटेरे शासक वर्गों और उनके पुलिस/खुफिया संगठनों ने हमारी पार्टी पर षड़यंत्रकारी बेबुनियाद ढंग से आरोप लगाए हैं कि इसमें माओवादी पार्टी का भी हाथ हो सकता है। इसका हमारी पार्टी पुरजोर खण्डन करती है। देश की उत्पीडि़त जनता को साफ तौर पर मालूम है कि शोषित जनता की मुक्ति के लिए लड़ने वाली हमारी पार्टी आम लोगों को निशाना बनाने और उनकी जान को जोखिम में डालने वाले हमले कभी नहीं करती। लुटेरे शासक वर्ग और उनके सुर में सुर मिलाने वाला काॅर्पोरेट मीडिया अपने बुरे मंसूबों के साथ हम पर जानबूझकर इसलिए झूठे आरोप मढ़ रहे हैं ताकि हमारी पार्टी को आतंकवादी संगठन के रूप में तथा हमारे जायज जन आंदोलन को आतंकवादी आंदोलन के रूप में चित्रित किया जा सके जिससे कि उनकी दमनकारी नीतियों तथा जनता पर जारी युद्ध - आॅपरेशन ग्रीन हंट के दूसरे चरण के तहत शुरू हुई सेना की तैनाती को वैधता हासिल की जा सके।

हमारे देश में अब तक हुए बम विस्फोटों का जायज़ा लिया जाए, तो ज्यादातर घटनाओं में यह बात साफ हो ही नहीं पाई कि उनके असली दोषी कौन थे और दोषियों के रूप में दिखाए जा रहे लोगों के पीछे छिपे असली गुनाहगार कौन थे। यह रिवाज सा बना है कि विस्फोट की कोई भी घटना घटती है तो हिंदू धर्म की पक्षपाती भारतीय राज्यसत्ता और उसके खुफिया/जांच संस्थाएं कार्पोरेट मीडिया तुरंत ही और बिना किसी आधार के मुसलमानों और तथाकथित इस्लामिक आतंकी संगठनों को जिम्मेदार ठहराते हैं। इस तरह के तमाम हमलों के लिए मुस्लिम समाज को गुनाहगार निरूपित करने हेतु भारतीय राज्यसत्ता और कांग्रेस, भाजपा जैसी शासक वर्गीय पार्टियों के नेताओं द्वारा रची गई साजिश के तहत आईबी ने खुद ही इंडियन मुजाहिद्दीन नामक एक छद्म संगठन खड़ा किया जिसे हाल में हुए हर बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार बताकर प्रचारित किया जा रहा है। ऐसे आरोपों की सत्यता को लेकर प्रश्न उठाने वालों और उन पर समग्र निष्पक्ष जांच की मांग करने वालों पर एकायक देशद्रोही का ठप्पा लगाकर कार्पोरेट मीडिया के सम्राट और शासक वर्गों के तलवे चाटने वाले बुद्धिजीवी उन पर बेतुके, आवेशपूर्ण और आक्रामक ढंग से टूट पड़ रहे हैं। इससे बहुसंख्यक जनता को यह जानने का मौका ही नहीं मिल रहा है कि सच्चाई क्या है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाने वाले हमारे देश में सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि सच्चाइयों का पता लगाने की मांग नहीं करना देशभक्ति की और करना देशद्रोह की कसौटी बन गई है!

विगत में हुए मक्का मस्जिद, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस आदि बम विस्फोट के मामलों में पुलिस ने सैकड़ों निर्दोष मुसलमानों, खासकर नौजवानों को गिरफ्तार कर, अमानवीय यातनाएं देकर जेलों में बंद कर दिया। कई लोगों को फर्जी मुठभेड़ों में मार डाला। बाद में यह सबूत मिलने के बावजूद भी कि संघ गिरोह (आरएसएस) से जुड़े हिंदू कट्टरवादी संगठनों ने इन जघन्य करतूतों को अंजाम दिया था, पीडि़त मुसलमानों को इंसाफ नहीं मिल सका। अभिनव भारत, हिंदू डिफेंस फोर्स, राष्ट्रीय जागरण मंच, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद आदि हिंदू आतंकी संगठनों के एक भी नेता को आज तक सजा नहीं मिली। वहीं दूसरी ओर संसद पर हमले के मामले में अफ्जल गुरू को, गोधरा रेल जलाने के मामले में 11 मुसलमानों को पिछले 1 मार्च को सुनाई गई फांसी की सजाएं राज्यसत्ता की मुस्लिम विरोधिता और हिंदू कट्टरवाद की पक्षधरता को समझने के लिए चंद उदाहरण भर हैं। जब दो हजार से ज्यादा मुसलमानों के कत्लेआम के लिए जिम्मेदार नरेंद्र मोदी जैसे हत्यारे सीना तानकर घूम रहे हों, वहीं बेतुके और आधे-अधूरे सबूतों से मुसलमानों को सजाएं सुनाकर राज्यसत्ता ने मुसलमानों को बेहद नाराज और आक्रोशित किया।

एक सच्चाई यह है कि मुस्लिम समाज, खासकर नौजवानों का एक बड़ा तबका बाबरी मस्जिद की तबाही, गुजरात नरसंहार आदि के चलते भारत के शासक वर्गों से बेहद असंतुष्ट है। एक और अकाट्य सच्चाई यह है कि इस असंतोष ने कुछ इस्लामिक संगठनों को पैदा किया। इस परिस्थिति का फायदा उठाकर, इस तरह के संगठनों को अपने प्रभाव में लेकर या फिर उन्हें षड़यंत्रकारी ढंग से गुमराह कर, कुछ नए संगठनों को पैदा कर दोनों भारत और पाकिस्तान की आरएडब्ल्यू (राॅ), आईबी, आईएसआई जैसी संस्थाएं अपने स्वार्थ राजनीतिक हितों के मद्देनजर दोनों ही देशों में इस तरह के बम विस्फोट और हमले करवा रही हैं। कई असंतुष्ट और आक्रोशित मुस्लिम नौजवान इस जाल में फंसकर, यह नहीं समझते हुए कि उनके असल दुश्मन कौन हैं, इस तरह की अविवेकपूर्ण हिंसात्मक कार्रवाइयों में शिरकत कर रहे हैं। और आम लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार बन रहे हैं। यह इस तरह का जहरीला दुष्चक्र है कि उन्हें पता ही नहीं होता कि कौन लोग परदे के पीछे से उन्हें चला रहे हैं और इस किस्म के हमलों से किन वर्गों के हित पूरे हो रहे हैं।

दूसरी ओर, इस बात के ठोस सबूत मिलने के बाद कि मक्का मस्जिद, मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस विस्फोटों के लिए अभिनव भारत नामक संघ गिरोह (आरएसएस) से जुड़ा संगठन जिम्मेदार है, देश की जनता ने भगवा आतंकवाद को एक खतरनाक रुझान के रूप में पहचानना शुरू किया। बाद में जब यह पता चला कि अजमेर शेरीफ में हुए बम विस्फोट के लिए भी भगवा आतंकी ही जिम्मेदार हैं, यह मांग उभरकर आई कि देश में विभिन्न जगहों पर हुए तमम बम विस्फोटों की घटनाओं पर हुई जांचों की समीक्षा की जाए। पुलिस अत्याचारों से पीडि़त मालेगांव और हैदराबाद के मुसलमान नौजवानों ने यह मांग की सरकार उनसे माफी मांग ले। कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ऊपर से चाहे कुछ भी कहे, अपने स्वार्थपूर्ण राजनीतिक हितों के मद्देनजर भगवा आतंकवाद को शह देते हुए इन मांगों को अनसुना करती रही है। आम तौर पर हिंदू धार्मिक कट्टरवाद का समर्थन करने वाला काॅर्पोरेट मीडिया जहां एक तरफ बिना किसी सबूत के ही मुसलमानों और इस्लामिक संगठनों पर आक्रामक ढंग से टूट पड़ता है, वहीं दूसरी ओर बम विस्फोट की विभिन्न घटनाओं में भगवा आतंकी संगठनों का हाथ होने का साफ सबूत मिल जाने के बावजूद भी वह या तो उस पर कम से कम रिपोर्टिंग करता है या फिर दबा देता है।

इस पृष्ठभूमि में, 13 जुलाई के मुम्बई बम विस्फोटों के लिए दक्षिणपंथी भगवा आतंकी संगठन या फिर आईबी, राॅ जैसी खुफिया संस्थाओं द्वारा प्रायोजित तथाकथित इस्लामिक मिलिटेंट संगठन जिम्मेदार होने की संभवना ज्यादा है। या फिर पुलिस अधिकारियों और शासक वर्गीय राजनेताओं से सांठगांठ करने वाले माफिया गिरोह भी इन हमलों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इन हमलों को चाहे किसी ने भी अंजाम दिया हो, इस तरह की अविवेकपूर्ण हिंसात्मक कार्रवाइयों का फायदा शासक वर्गों को ही मिलेगा। पहला, वर्तमान में ज्वलंत समस्यओं के रूप में मौजूद महंगाई, भ्रष्टाचार, घोटाले, काला धन, स्विस बैंक खाते आदि से जनता का ध्यान बंटाना। दूसरा, आतंकवाद को बहुत बड़े खतरे के रूप में दिखाकर और ज्यादा क्रूरतापूर्ण कानूनों को तैयार करना तथा लाखों करोड़ का जन धन का दुरुपयोग करते हुए साम्राज्यवादी देशों से बड़े पैमाने पर हथियार और तकनीक की खरीद कर दमनकारी मशीनरी के दांतों को और ज्यादा धारदार बनाना। तीसरा, आतंक के खिलाफ युद्ध के नाम पर अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा छेड़े गए दुराक्रमणकारी युद्धों, हमलों और धौंस का प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन करते हुए दक्षिण एशिया में उसके कनिष्ठ भागीदार की भूमिका निभा रहे भारतीय राज्य का होमलैण्ड सेक्यूरिटी, नागरिक परमाणु समझौता आदि देशद्रोहपूर्ण समझौतों से देश को साम्राज्यवाद के आगे पूरी बेशर्मी से घुटने टेक देना। चैथा, सरकारों द्वारा लागू जन विरोधी और साम्राज्यवादपरस्त नव उदार नीतियों के खिलाफ सुलग रहे जन आंदोलनों और बढ़ते माओवादी क्रांतिकारी आंदोलन का सैनिक रूप से दमन करने के पक्ष में आतंकवाद का डर दिखाकर जनमत को तैयार कर लेना। और सबूतों के बिना ही हर बार इस तरह के विस्फोटों के लिए मुसलमानों और इस्लामिक संगठनों को जिम्मेदार बताकर हिंदू वोट बैंक को मजबूत बनाना तथा रोटी, कपड़ा, मकान, महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, विस्थापन जैसी बुनियादी समस्याओं से देश की जनता का ध्यान बंटाकर अपने शोषणकारी शासन को बेरोकटोक जारी रखना कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए तथा सामंती दलाल नौकरशाह पूंजीपति वर्गों के लिए, जिनका वे प्रतिनिधित्व करती हैं, जरूरी है।

इसलिए, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) यह मानती है कि एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से ही यह पता लगाना संभव है कि मुम्बई विस्फोटों के लिए जिम्मेदार कौन हैं। हमारी पार्टी देश की जनता और जनवादियों से यह अपील करती है कि वे शासक वर्गों, उनके खुफिया संगठनों और काॅर्पोरेट मीडिया द्वारा जारी उन्मादपूर्ण प्रचार, गलतफहमियों और पूर्वाग्रहों का शिकार बनें। हमारी पार्टी मांग करती है कि इन विस्फोटों के लिए जिम्मेदार लोगों को ढूंढ़ निकालकर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, हमारी पार्टी देशवासियों का यह आह्वान करती है कि वे सरकारों से यह मांग करें कि 1992 से लेकर अभी तक हुए बम विस्फोट की तमाम घटनाओं पर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जाए तथा जेलों में बंद मुसलमानों और ईसाइयों को बिना शर्त रिहा किया जाए। देश की तमाम जनता से हमारा आग्रह है कि वह बाबरी मस्जिद का विध्वंस, गुजरात नरसंहार, कंधमाल (ओडि़शा) हमलों समेत देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हुए तमाम हमलों के लिए जिम्मेदार भगवा आतंकी सरगनाओं को कड़ी सजा देने की मांग करे तथा हिंदू धार्मिक कट्टरवाद और सभी किस्म के धार्मिक अधराष्ट्रवाद का खण्डन करे।

(अभय)

प्रवक्ता

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